धान में बोनेपन रोग (Southern Rice Black-Streaked Dwarf Virus) से बचाव कैसे करें
धान की फसल हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और भारत के कई राज्यों में किसानों की मुख्य फसल मानी जाती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में धान की फसल में कई प्रकार के वायरस और कीट रोग तेजी से फैल रहे हैं। इनमें से एक खतरनाक रोग है Southern Rice Black-Streaked Dwarf Virus (SRBSDV) जिसे सामान्य भाषा में धान का बोनेपन रोग कहा जाता है। यह रोग किसानों की फसल उत्पादन क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
कृषि विज्ञान केंद्र फरीदाबाद तथा चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार द्वारा किसानों को इस रोग से बचाव के लिए वैज्ञानिक सलाह जारी की गई है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि यह रोग क्या है, इसके लक्षण क्या हैं, रोग फैलने का कारण क्या है तथा इससे बचाव के उपाय कौन-कौन से हैं।
धान में बोनेपन रोग क्या है?
Southern Rice Black-Streaked Dwarf Virus एक वायरल रोग है जो मुख्य रूप से धान की फसल में फैलता है। यह रोग पौधों की सामान्य वृद्धि को रोक देता है और पौधे छोटे तथा कमजोर रह जाते हैं। इस बीमारी के कारण धान की पैदावार में भारी गिरावट देखी जाती है।
यह वायरस Reoviridae परिवार का dsRNA वायरस माना जाता है। यह रोग सीधे हवा या पानी से नहीं फैलता बल्कि एक विशेष कीट के माध्यम से फैलता है।
रोग फैलाने वाला कीट कौन सा है?
इस रोग को फैलाने वाला मुख्य कीट सफेद पीठ वाला तेला (White Backed Planthopper) है। यह कीट संक्रमित पौधों से वायरस लेकर स्वस्थ पौधों तक पहुंचाता है। यदि खेत में इस कीट की संख्या अधिक हो जाए तो वायरस तेजी से पूरी फसल में फैल सकता है।
धान में बोनेपन रोग के प्रमुख लक्षण
- धान के पौधे छोटे और बौने दिखाई देते हैं।
- पत्तियां गहरे हरे रंग की हो जाती हैं।
- जड़ों का विकास कमजोर हो जाता है।
- पौधों की बढ़वार रुक जाती है।
- कुछ खेतों में पौधे झुंड के रूप में प्रभावित दिखाई देते हैं।
- धान की बालियां सही प्रकार से विकसित नहीं होतीं।
- उत्पादन में भारी कमी देखने को मिलती है।
वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए बचाव के उपाय
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसान समय रहते इस रोग की पहचान कर लें तो इसके नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
- खेतों की नियमित निगरानी करें।
- सफेद पीठ वाले तेला की रोकथाम करें।
- संक्रमित पौधों को तुरंत खेत से निकाल दें।
- नर्सरी की बुवाई सही समय पर करें।
- खेत में पानी का उचित प्रबंधन रखें।
- अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करें।
कौन सी दवा का प्रयोग करें?
विशेषज्ञों के अनुसार सफेद पीठ वाले तेला के नियंत्रण के लिए किसान निम्न कीटनाशकों का प्रयोग कर सकते हैं:
- डायनोफ्यूरान 20% SG
- पाइमेट्रोजिन 50% WG
- अनुशंसित मात्रा में पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें
पहला छिड़काव नर्सरी बुवाई के 12 से 15 दिन बाद तथा दूसरा छिड़काव 21 से 25 दिन बाद करना लाभदायक माना जाता है।
सांस्कृतिक एवं कृषि प्रबंधन उपाय
- देर से नर्सरी लगाने से बचें।
- संक्रमित खेतों की पहचान कर निगरानी रखें।
- खेत में जलभराव न होने दें।
- संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें।
- खरपतवार नियंत्रण नियमित रूप से करें।
धान की फसल को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सलाह
यदि खेत में शुरुआती अवस्था में ही रोग दिखाई दे तो तुरंत कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करें। समय पर कीट नियंत्रण और उचित प्रबंधन अपनाने से किसान अपनी फसल को बड़े नुकसान से बचा सकते हैं। लगातार निगरानी और वैज्ञानिक सलाह का पालन करना सबसे जरूरी है।
FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. धान में बोनेपन रोग किस कारण होता है?
यह रोग Southern Rice Black-Streaked Dwarf Virus के कारण होता है।
2. यह रोग कैसे फैलता है?
यह रोग सफेद पीठ वाले तेला कीट के माध्यम से फैलता है।
3. इस रोग का मुख्य लक्षण क्या है?
पौधों का बौना रह जाना और बढ़वार रुक जाना इसका मुख्य लक्षण है।
4. क्या यह रोग पूरी फसल खराब कर सकता है?
हाँ, समय पर नियंत्रण न होने पर उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
5. रोग से बचाव के लिए क्या करें?
कीट नियंत्रण, खेत की निगरानी और संक्रमित पौधों को हटाना जरूरी है।
6. कौन सा कीट इस रोग को फैलाता है?
सफेद पीठ वाला तेला (White Backed Planthopper) इस रोग का वाहक है।
7. किसानों को कब छिड़काव करना चाहिए?
पहला छिड़काव 12-15 दिन बाद और दूसरा 21-25 दिन बाद करना चाहिए।
8. क्या कृषि विश्वविद्यालय ने इस पर सलाह जारी की है?
हाँ, CCS HAU हिसार और कृषि विज्ञान केंद्र फरीदाबाद ने वैज्ञानिक सलाह जारी की है।
Disclaimer
यह जानकारी विभिन्न कृषि विशेषज्ञों, कृषि विज्ञान केंद्र तथा विश्वविद्यालय द्वारा जारी सलाह के आधार पर दी गई है। किसी भी दवा या कीटनाशक का उपयोग करने से पहले अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी या विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। वेबसाइट किसी भी प्रकार के नुकसान की जिम्मेदारी नहीं लेती।
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